रिपुसूदन पद कमल नमामी

चौपाई ५, दोहा १७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

रिपुसूदन पद कमल नमामी। सूर सुसील भरत अनुगामी॥ महाबीर बिनवउँ हनुमाना। राम जासु जस आप बखाना॥ ५ ॥

अर्थ

मैं श्रीशत्रुघ्नजी के चरणकमलों को प्रणाम करता हूँ, जो बड़े वीर, सुशील और श्रीभरतजी के पीछे चलनेवाले हैं। मैं महावीर श्रीहनुमानजी की विनती करता हूँ, जिनके यश का श्रीरामचन्द्रजी ने स्वयं (अपने श्रीमुख से) वर्णन किया है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीताराम और परिकर वन्दना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीताराम, अयोध्यापुरी, सरयू, दशरथ, कौसल्या, लक्ष्मण और भक्त मुनियों की श्रद्धापूर्ण वन्दना का वर्णन है।

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सीताराम और परिकर वन्दना