सेज रुचिर रचि रामु उठाए
सेज रुचिर रचि रामु उठाए
चौपाई ३, दोहा ३५६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सेज रुचिर रचि रामु उठाए। प्रेम समेत पलँग पौढ़ाए॥ अग्या पुनि पुनि भाइन्ह दीन्ही। निज निज सेज सयन तिन्ह कीन्ही॥ ३ ॥
अर्थ
इस प्रकार सुन्दर शय्या सजाकर [माताओं ने] श्रीरामचन्द्रजी को उठाया और प्रेमसहित पलँगपर पौढ़ाया। श्रीरामजी ने बार-बार भाइयों को आज्ञा दी। तब वे भी अपनी-अपनी शय्याओंपर सो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना