देखि स्याम मृदु मंजुल गाता
देखि स्याम मृदु मंजुल गाता
चौपाई ४, दोहा ३५६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि स्याम मृदु मंजुल गाता। कहहिं सप्रेम बचन सब माता॥ मारग जात भयावनि भारी। केहि बिधि तात ताड़का मारी॥ ४ ॥
अर्थ
श्रीरामजी के साँवले, सुन्दर, कोमल अंगों को देखकर सब माताएँ प्रेमसहित वचन कह रही हैं— हे तात! मार्ग में जाते हुए तुमने बड़ी भयावनी ताड़का राक्षसी को किस प्रकार से मारा?
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
बारात का अयोध्या लौटना