सत्य कहेहु गिरिभव तनु एहा

चौपाई ३, दोहा ८० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सत्य कहेहु गिरिभव तनु एहा। हठ न छूट छूटै बरु देहा॥ कनकउ पुनि पषान तें होई। जारेहुँ सहजु न परिहर सोई॥ ३ ॥

अर्थ

आपने यह सत्य ही कहा कि मेरा यह शरीर पर्वत से उत्पन्न हुआ है। इसलिए हठ नहीं छूटेगा, देह भले ही छूट जाए। सोना भी पत्थर से ही उत्पन्न होता है, सो उसे जलाए जाने पर भी वह अपने स्वभाव को नहीं छोड़ता।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।

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सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती