जौं न चलब हम कहे तुम्हारें
जौं न चलब हम कहे तुम्हारें
चौपाई ४, दोहा १६६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं न चलब हम कहे तुम्हारें। होउ नास नहिं सोच हमारें॥ एकहिं डर डरपत मन मोरा। प्रभु महिदेव श्राप अति घोरा॥ ४ ॥
अर्थ
यदि मैं आपके कथन के अनुसार नहीं चलूँगा, तो [भले ही] मेरा नाश हो जाय। मुझे इसकी चिन्ता नहीं है। मेरा मन तो हे प्रभो! [केवल] एक ही डर से डर रहा है कि महिदेव का शाप बड़ा भयानक होता है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा