सतीं सो दसा संभु कै देखी

चौपाई ३, दोहा ५० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सतीं सो दसा संभु कै देखी। उर उपजा संदेहु बिसेषी॥ संकरु जगतबंद्य जगदीसा। सुर नर मुनि सब नावत सीसा॥ ३ ॥

अर्थ

सतीजी ने शंकरजी की वह दशा देखी तो उनके मन में बड़ा सन्देह उत्पन्न हो गया। [वे मन-ही-मन कहने लगीं कि] शंकरजी की सारा जगत् वन्दना करता है, वे जगत् के ईश्वर हैं; देवता, मनुष्य, मुनि सब उनके प्रति सिर नवाते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सती का भ्रम और खेद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का श्रीराम की दिव्यता पर संशय, परीक्षा और पश्चाताप का वर्णन है।

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सती का भ्रम और खेद