जय सच्चिदानंद जग पावन

चौपाई २, दोहा ५० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जय सच्चिदानंद जग पावन। अस कहि चलेउ मनोज नसावन॥ चले जात सिव सती समेता। पुनि पुनि पुलकत कृपानिकेता॥ २ ॥

अर्थ

जगत् के पवित्र करनेवाले सच्चिदानन्द की जय हो, इस प्रकार कहकर कामदेव का नाश करनेवाले श्रीशिवजी चल पड़े। कृपानिकेत शिवजी बार-बार आनन्द से पुलकित होते हुए सतीजी के साथ चले जा रहे थे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सती का भ्रम और खेद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का श्रीराम की दिव्यता पर संशय, परीक्षा और पश्चाताप का वर्णन है।

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सती का भ्रम और खेद