सतिहि ससोच जानि बृषकेतू
सतिहि ससोच जानि बृषकेतू
चौपाई ३, दोहा ५८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सतिहि ससोच जानि बृषकेतू। कहीं कथा सुंदर सुखहेतू॥ बरनत पंथ बिबिध इतिहासा। बिस्वनाथ पहुँचे कैलासा॥ ३ ॥
अर्थ
वृषकेतु शिवजी ने सती को चिन्तायुक्त जानकर उन्हें सुख देने के लिये सुन्दर कथाएँ कहीं। इस प्रकार मार्ग में विविध प्रकार के इतिहासों को कहते हुए विश्वनाथ कैलास जा पहुँचे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी द्वारा सती का त्याग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी द्वारा सती को त्यागने और गहन समाधि में लीन होने का वर्णन है।
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शिवजी द्वारा सती का त्याग