तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन

चौपाई ४, दोहा ५८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन। बैठे बटतर करि कमलासन॥ संकर सहज सरूपु सम्हारा। लागि समाधि अखंड अपारा॥ ४ ॥

अर्थ

वहाँ फिर शिवजी अपनी प्रतिज्ञा को याद करके बटतर के नीचे पद्मासन लगाकर बैठ गये। शिवजी ने अपना स्वाभाविक रूप सँभाला। उनकी अखण्ड और अपार समाधि लग गयी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी द्वारा सती का त्याग” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी द्वारा सती को त्यागने और गहन समाधि में लीन होने का वर्णन है।

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शिवजी द्वारा सती का त्याग