सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ
सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ
चौपाई ३, दोहा ५३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ। देखहु नारि सुभाव प्रभाऊ॥ निज माया बलु हृदयँ बखानी। बोले बिहसि रामु मृदु बानी॥ ३ ॥
अर्थ
स्त्रीस्वभाव का असर तो देखो कि वहाँ (उन सर्वज्ञ भगवान् के सामने) भी सतीजी छिपाव करना चाहती हैं। अपनी मायाके बल को हृदय में बखानकर, श्रीरामचन्द्रजी हँसकर कोमल वाणी से बोले।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सती का भ्रम और खेद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का श्रीराम की दिव्यता पर संशय, परीक्षा और पश्चाताप का वर्णन है।
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सती का भ्रम और खेद