सती कपटु जानेउ सुरस्वामी
सती कपटु जानेउ सुरस्वामी
चौपाई २, दोहा ५३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सती कपटु जानेउ सुरस्वामी। सबदरसी सब अंतरजामी॥ सुमिरत जाहि मिटइ अग्याना। सोइ सरबग्य रामु भगवाना॥ २ ॥
अर्थ
सब कुछ देखनेवाले और सबके हृदय की जाननेवाले देवताओं के स्वामी श्रीरामचन्द्रजी ने सती के कपट को जान गये; जिनके स्मरणमात्र से अज्ञान का नाश हो जाता है, वही सर्वज्ञ भगवान् श्रीरामचन्द्रजी हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सती का भ्रम और खेद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का श्रीराम की दिव्यता पर संशय, परीक्षा और पश्चाताप का वर्णन है।
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सती का भ्रम और खेद