सती बिधात्री इंदिरा देखीं अमित अनूप

दोहा ५४ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

सती बिधात्री इंदिरा देखीं अमित अनूप। जेहिं जेहिं बेष अजादि सुर तेहि तेहि तन अनुरूप॥ ५४ ॥

अर्थ

उन्होंने अनगिनत अनुपम सती, ब्रह्माणी और लक्ष्मी देखीं। जिस-जिस रूप में ब्रह्मा आदि देवता थे, उसी के अनुकूल रूप में [उनकी] ये सब [शक्तियाँ] भी थीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सती का भ्रम और खेद” प्रकरण का दोहा ५४ है। इस प्रकरण में सती का श्रीराम की दिव्यता पर संशय, परीक्षा और पश्चाताप का वर्णन है।

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सती का भ्रम और खेद