देखे जहँ तहँ रघुपति जेते

चौपाई १, दोहा ५५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

देखे जहँ तहँ रघुपति जेते। सक्तिन्ह सहित सकल सुर तेते॥ जीव चराचर जो संसारा। देखे सकल अनेक प्रकारा॥ १ ॥

अर्थ

सतीजी ने जहाँ-तहाँ जितने रघुपति देखे, शक्तियों सहित वहाँ उतने ही सारे देवताओं को भी देखा। संसार में जो चराचर जीव हैं, वे भी अनेक प्रकार से सब देखे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सती का भ्रम और खेद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का श्रीराम की दिव्यता पर संशय, परीक्षा और पश्चाताप का वर्णन है।

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सती का भ्रम और खेद