देखे सिव बिधि बिष्नु अनेका
देखे सिव बिधि बिष्नु अनेका
चौपाई ४, दोहा ५४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देखे सिव बिधि बिष्नु अनेका। अमित प्रभाउ एक तें एका॥ बंदत चरन करत प्रभु सेवा। बिबिध बेष देखे सब देवा॥ ४ ॥
अर्थ
सतीजी ने अनेक शिव, ब्रह्मा और विष्णु देखे, जो एक-से-एक बढ़कर असीम प्रभाव वाले थे। [उन्होंने देखा कि] भाँति-भाँति के वेष धारण किये सभी देवता श्रीरामचन्द्रजी की चरणवन्दना और सेवा कर रहे हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सती का भ्रम और खेद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का श्रीराम की दिव्यता पर संशय, परीक्षा और पश्चाताप का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
सती का भ्रम और खेद