सतीं हृदयँ अनुमान किय सबु जानेउ
सतीं हृदयँ अनुमान किय सबु जानेउ
दोहा ५७ (क) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सतीं हृदयँ अनुमान किय सबु जानेउ सर्बग्य। कीन्ह कपटु मैं संभु सन नारि सहज जड़ अग्य॥ ५७ (क) ॥
अर्थ
सतीजी ने हृदय में अनुमान किया कि सर्वज्ञ शिवजी सब जान गये। मैंने शिवजी से कपट किया, स्त्री स्वभाव से ही जड़ और अज्ञानी होती हूँ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी द्वारा सती का त्याग” प्रकरण का दोहा ५७ (क) है। इस प्रकरण में शिवजी द्वारा सती को त्यागने और गहन समाधि में लीन होने का वर्णन है।
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शिवजी द्वारा सती का त्याग