कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला
कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला
चौपाई ४, दोहा ५७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला। सत्यधाम प्रभु दीनदयाला॥ जदपि सतीं पूछा बहु भाँती। तदपि न कहेउ त्रिपुर आराती॥ ४ ॥
अर्थ
हे कृपालु ! कहिये, आपने कौन-सी प्रतिज्ञा की है ? हे प्रभो! आप सत्य के धाम और दीनदयालु हैं। यद्यपि सतीजी ने बहुत प्रकार से पूछा, परन्तु त्रिपुरारि शिवजी ने कुछ न कहा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी द्वारा सती का त्याग” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी द्वारा सती को त्यागने और गहन समाधि में लीन होने का वर्णन है।
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शिवजी द्वारा सती का त्याग