सासु ससुर गुर सेवा करेहू
सासु ससुर गुर सेवा करेहू
चौपाई ३, दोहा ३३४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सासु ससुर गुर सेवा करेहू। पति रुख लखि आयसु अनुसरेहू॥ अति सनेह बस सखीं सयानी। नारि धरम सिखवहिं मृदु बानी॥ ३ ॥
अर्थ
सास, ससुर और गुरु की सेवा करना। पति का रुख देखकर उनकी आज्ञा का अनुसरण करना। अत्यन्त स्नेह के वश सयानी सखियाँ कोमल वाणी से नारी-धर्म सिखाती हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह