पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं
पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं
चौपाई २, दोहा ३३४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं। देइ असीस सिखावनु देहीं॥ होएहु संतत पियहि पिआरी। चिरु अहिबात असीस हमारी॥ २ ॥
अर्थ
वे बार-बार सीताजी को गोद कर लेती हैं और आशीर्वाद देकर सिखावन देती हैं--तुम सदा अपने पति की प्यारी होओ, तुम्हारा सोहाग अचल हो; हमारी यही आशिष है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह