सादर सकल कुअँरि समुझाईं

चौपाई ४, दोहा ३३४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सादर सकल कुअँरि समुझाईं। रानिन्ह बार बार उर लाईं॥ बहुरि बहुरि भेटहिं महतारीं। कहहिं बिरंचि रचीं कत नारीं॥ ४ ॥

अर्थ

आदर के साथ सब कुमारियों को समझाईं। रानियों ने बार-बार उन्हें हृदय में लगा लिया। फिर बार-बार माताएँ भेंटती हैं और कहती हैं—ब्रह्मा ने नारी क्यों रचीं?

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीसीता-राम विवाह