सारद सेस महेस बिधि आगम निगम

दोहा १२ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

सारद सेस महेस बिधि आगम निगम पुरान। नेति नेति कहि जासु गुन करहिं निरंतर गान॥ १२ ॥

अर्थ

सरस्वतीजी, शेषजी, शिवजी, ब्रह्माजी, शास्त्र, वेद और पुराण-ये सब “नेति-नेति' कहकर (पार नहीं पाकर ' ऐसा नहीं ', 'ऐसा नहीं ' कहते हुए) सदा जिनका गुणगान किया करते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का दोहा १२ है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।

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तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता