सब जानत प्रभु प्रभुता सोई
चौपाई १, दोहा १३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सब जानत प्रभु प्रभुता सोई। तदपि कहें बिनु रहा न कोई॥ तहाँ बेद अस कारन राखा। भजन प्रभाउ भाँति बहु भाषा॥ १ ॥
अर्थ
यद्यपि प्रभु श्रीरामचन्द्रजी की प्रभुता को सब ऐसी (अकथनीय) ही जानते हैं तथापि कहे बिना कोई नहीं रहा। इसमें वेद ने ऐसा कारण बताया है कि भजन का प्रभाव बहुत तरह से कहा गया है। (अर्थात् भगवान् की महिमा का पूरा वर्णन तो कोई कर नहीं सकता; परन्तु जिससे जितना बन पड़े उतना भगवान् का गुणगान करना चाहिये। क्योंकि भगवान् के गुणगानरूपी भजन का प्रभाव बहुत ही अनोखा है, उसका नाना प्रकार से शास्त्रों में वर्णन है। थोड़ा-सा भी भगवान् का भजन मनुष्य को सहज ही भवसागर से तार देता है)।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।