सरद बिमल बिधु बदनु सुहावन

चौपाई २, दोहा ३१६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सरद बिमल बिधु बदनु सुहावन। नयन नवल राजीव लजावन॥ सकल अलौकिक सुंदरताई। कहि न जाइ मनहीं मन भाई॥ २ ॥

अर्थ

उनका सुन्दर मुख शरत्पूर्णिमा के निर्मल चन्द्रमा के समान और नेत्र नवीन कमल को लजानेवाले हैं। सारी सुन्दरता अलौकिक है। वह कही नहीं जा सकती, मन-ही-मन बहुत प्रिय लगती है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३१६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत