बंधु मनोहर सोहहिं संगा

चौपाई ३, दोहा ३१६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बंधु मनोहर सोहहिं संगा। जात नचावत चपल तुरंगा॥ राजकुअँर बर बाजि देखावहिं। बंस प्रसंसक बिरिद सुनावहिं॥ ३ ॥

अर्थ

साथ में मनोहर भाई शोभित हैं, जो चञ्चल घोड़ों को नचाते हुए चले जा रहे हैं। राजकुमार श्रेष्ठ घोड़ों को (उनकी चाल को) दिखला रहे हैं और वंश की प्रशंसा करनेवाले (मागध-भाट) विरुदावली सुना रहे हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत