सफल पूगफल कदलि रसाला

चौपाई ४, दोहा ३४४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सफल पूगफल कदलि रसाला। रोपे बकुल कदंब तमाला॥ लगे सुभग तरु परसत धरनी। मनिमय आलबाल कल करनी॥ ४ ॥

अर्थ

फलसहित सुपारी, केला, आम, मौलसिरी, कदम्ब और तमाल के वृक्ष लगाये गये। वे लगे हुए सुन्दर वृक्ष [फलों के भार से] पृथ्वी को छू रहे हैं। उनके मणियों के थाले बड़ी सुन्दर कारीगरी से बनाये गये हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना