बिबिध भाँति मंगल कलस गृह गृह
बिबिध भाँति मंगल कलस गृह गृह
दोहा ३४४ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
बिबिध भाँति मंगल कलस गृह गृह रचे सँवारि। सुर ब्रह्मादि सिहाहिं सब रघुबर पुरी निहारि॥ ३४४ ॥
अर्थ
अनेक प्रकार के मंगल-कलश घर-घर सजाकर रखे गये हैं। श्रीरघुनाथजी की पुरी (अयोध्या) को देखकर ब्रह्मा आदि सब देवता सिहाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का दोहा ३४४ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना