गलीं सकल अरगजाँ सिंचाईं
गलीं सकल अरगजाँ सिंचाईं
चौपाई ३, दोहा ३४४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
गलीं सकल अरगजाँ सिंचाईं। जहँ तहँ चौकें चारु पुराईं॥ बना बजारु न जाइ बखाना। तोरन केतु पताक बिताना॥ ३ ॥
अर्थ
सारी गलियाँ अरगजे से सिंचाई गईं, जहाँ-तहाँ सुन्दर चौक पुराये गये। तोरणों, केतुओं, पताकाओं और वितानों से बाजार ऐसा सजा कि जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना