सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर
सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर
दोहा १५ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर गौरि पसाउ। तौ फुर होउ जो कहेउँ सब भाषा भनिति प्रभाउ॥ १५ ॥
अर्थ
यदि मुझ पर श्रीशिवजी और पार्वतीजी की स्वप्न में भी सचमुच प्रसन्नता हो, तो मैंने इस भाषा, कविता का जो प्रभाव कहा है, वह सब सच हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “वाल्मीकि, शिव-पार्वती आदि वन्दना” प्रकरण का दोहा १५ है। इस प्रकरण में वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, शिव-पार्वती सहित समस्त पूज्य शक्तियों की वन्दना का वर्णन है।
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वाल्मीकि, शिव-पार्वती आदि वन्दना