बंदउँ अवध पुरी अति पावनि
बंदउँ अवध पुरी अति पावनि
चौपाई १, दोहा १६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बंदउँ अवध पुरी अति पावनि। सरजू सरि कलि कलुष नसावनि॥ प्रनवउँ पुर नर नारि बहोरी। ममता जिन्ह पर प्रभुहि न थोरी॥ १ ॥
अर्थ
मैं अति पवित्र श्रीअयोध्यापुरी और कलियुग के पापों का नाश करनेवाली श्रीसरयू नदी की वन्दना करता हूँ। फिर अवधपुरी के उन नर-नारियों को प्रणाम करता हूँ जिन पर प्रभु श्रीरामचन्द्रजी की ममता थोड़ी नहीं है (अर्थात् बहुत है)।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीताराम और परिकर वन्दना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीताराम, अयोध्यापुरी, सरयू, दशरथ, कौसल्या, लक्ष्मण और भक्त मुनियों की श्रद्धापूर्ण वन्दना का वर्णन है।
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सीताराम और परिकर वन्दना