संत सरल चित जगत हित जानि
संत सरल चित जगत हित जानि
दोहा ३ (ख) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु। बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु॥ ३ (ख) ॥
अर्थ
संत सरल हृदय और जगत् के हितकारी होते हैं; उनके ऐसे स्वभाव और स्नेह को जानकर मैं विनय करता हूँ कि, मेरी इस बाल-विनय को सुनकर कृपा करके श्रीरामजी के चरणों में मुझे प्रीति दें।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “ब्राह्मण संत वन्दना” प्रकरण का दोहा ३ (ख) है। इस प्रकरण में ब्राह्मणों और संतों की महिमा, समभाव और लोककल्याणकारी कृपा का स्तुतिपूर्ण नमन का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
ब्राह्मण संत वन्दना