सांत बेषु करनी कठिन बरनि न
सांत बेषु करनी कठिन बरनि न
दोहा २६८ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सांत बेषु करनी कठिन बरनि न जाइ सरूप। धरि मुनितनु जनु बीर रसु आयउ जहँ सब भूप॥ २६८ ॥
अर्थ
शान्त वेष है, परन्तु करनी बहुत कठिन है; स्वरूप का वर्णन नहीं किया जा सकता। मानो वीर-रस ही मुनि का शरीर धारण करके, जहाँ सब राजालोग हैं, वहाँ आ गया हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का दोहा २६८ है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
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जयमाल पहनाना