संख निसान पनव बहु बाजे
संख निसान पनव बहु बाजे
चौपाई २, दोहा ३१३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
संख निसान पनव बहु बाजे। मंगल कलस सगुन सुभ साजे॥ सुभग सुआसिनि गावहिं गीता। करहिं बेद धुनि बिप्र पुनीता॥ २ ॥
अर्थ
शंख, निसान, पनव और बहुत-से बाजे बजने लगे तथा मंगल कलश और शुभ शकुन की वस्तुएँ सजायी गयीं। सुन्दर सुहागिन स्त्रियाँ गीत गा रही हैं और पवित्र ब्राह्मण वेद की ध्वनि कर रहे हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३१३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत