लेन चले सादर एहि भाँती

चौपाई ३, दोहा ३१३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

लेन चले सादर एहि भाँती। गए जहाँ जनवास बराती॥ कोसलपति कर देखि समाजू। अति लघु लाग तिन्हहि सुरराजू॥ ३ ॥

अर्थ

सब लोग इस प्रकार आदरपूर्वक बारात को लेने चले और जहाँ बारातियों का जनवासा था, वहाँ गये। अवधपति दशरथजी का समाज (वैभव) देखकर उन्हें देवराज इन्द्र भी बहुत ही तुच्छ लगने लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत