उपरोहितहि कहेउ नरनाहा
उपरोहितहि कहेउ नरनाहा
चौपाई १, दोहा ३१३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
उपरोहितहि कहेउ नरनाहा। अब बिलंब कर कारनु काहा॥ सतानंद तब सचिव बोलाए। मंगल सकल साजि सब ल्याए॥ १ ॥
अर्थ
तब राजा जनक ने पुरोहित शतानन्दजी से कहा कि अब देर का क्या कारण है। तब शतानन्दजी ने मंत्रियों को बुलाया। वे सब मंगल का सामान सजाकर ले आए।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३१३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत