संकर चापु जहाजु सागरु रघुबर बाहुबलु
संकर चापु जहाजु सागरु रघुबर बाहुबलु
सोरठा २६१ · बालकाण्ड
सोरठा पाठ
संकर चापु जहाजु सागरु रघुबर बाहुबलु। बूड़ सो सकल समाजु चढ़ा जो प्रथमहिं मोह बस॥ २६१ ॥
अर्थ
शिवजी का धनुष जहाज है और श्रीरामचन्द्रजी की भुजाओं का बल समुद्र है। [धनुष टूटने से] वह सारा समाज डूब गया, जो मोहवश पहले इस जहाज पर चढ़ा था।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “धनुषभंग” प्रकरण का सोरठा २६१ है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवधनुष-भंग और सभा में हर्षोल्लास का वर्णन है।
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धनुषभंग