समुझि महेस समाज सब जननि जनक
समुझि महेस समाज सब जननि जनक
दोहा ९५ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
समुझि महेस समाज सब जननि जनक मुसुकाहिं। बाल बुझाए बिबिध बिधि निडर होहु डरु नाहिं॥ ९५ ॥
अर्थ
महेश्वर (शिवजी) का समाज समझकर सब लड़कों के माता-पिता मुसकराते हैं। उन्होंने बहुत तरह से लड़कों को समझाया कि निडर हो जाओ, डर की कोई बात नहीं है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का दोहा ९५ है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात