लै अगवान बरातहि आए
लै अगवान बरातहि आए
चौपाई १, दोहा ९६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
लै अगवान बरातहि आए। दिए सबहि जनवास सुहाए॥ मैनाँ सुभ आरती सँवारी। संग सुमंगल गावहिं नारी॥ १ ॥
अर्थ
अगवान लोग बरात को लिवा लाये, उन्होंने सबको सुन्दर जनवासे दिये। मैना (पार्वतीजी की माता) ने शुभ आरती सजायी और उनके साथ की स्त्रियाँ उत्तम मंगलगीत गाने लगीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात