तन छार ब्याल कपाल भूषन नगन
तन छार ब्याल कपाल भूषन नगन
छन्द, दोहा ९५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
छन्द पाठ
तन छार ब्याल कपाल भूषन नगन जटिल भयंकरा। सँग भूत प्रेत पिसाच जोगिनि बिकट मुख रजनीचरा॥ जो जिअत रहिहि बरात देखत पुन्य बड़ तेहि कर सही। देखिहि सो उमा बिबाहु घर घर बात असि लरिकन्ह कही॥
अर्थ
दूल्हे के शरीर पर राख लगी है, साँप और कपाल के गहने हैं; वह नग्न, जटाधारी और भयंकर है। उसके साथ भयानक मुखवाले भूत, प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ और राक्षस हैं। जो बरात को देखकर जीता बचेगा, सचमुच उसके बड़े ही पुण्य हैं और वही उमा का विवाह देखेगा। लड़कों ने घर-घर यही बात कही॥
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का छन्द, दोहा ९५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात