संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी

चौपाई १, दोहा ३६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी। रामचरितमानस कबि तुलसी॥ करइ मनोहर मति अनुहारी। सुजन सुचित सुनि लेहु सुधारी॥ १ ॥

अर्थ

श्रीशिवजी की कृपासे उसके हृदय में सुन्दर बुद्धि का विकास हुआ, जिससे यह तुलसीदास श्रीरामचरितमानस का कवि हुआ। अपनी बुद्धि के अनुसार तो वह इसे मनोहर ही बनाता है। किंतु फिर भी हे सज्जनो! सुन्दर चित्त से सुनकर इसे आप सुधार लीजिये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य