जस मानस जेहि बिधि भयउ जग

दोहा ३५ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु। अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु॥ ३५ ॥

अर्थ

यह रामचरितमानस जैसा है, जिस प्रकार बना है और जिस हेतु से जगत् में इसका प्रचार हुआ, अब वही सब कथा मैं श्रीउमा-महेश्वर का स्मरण करके कहता हूँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का दोहा ३५ है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य