संभु दीन्ह उपदेस हित नहिं नारदहि

दोहा १२७ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

संभु दीन्ह उपदेस हित नहिं नारदहि सोहान। भरद्वाज कौतुक सुनहु हरि इच्छा बलवान॥ १२७ ॥

अर्थ

यद्यपि शिवजी ने यह हित की शिक्षा दी, पर नारदजी को वह अच्छी न लगी। हे भरद्वाज! अब कौतुक (तमाशा) सुनो। हरि की इच्छा बड़ी बलवान् है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का अभिमान और माया” प्रकरण का दोहा १२७ है। इस प्रकरण में नारद का कामजय के बाद अभिमान और भगवान की माया का प्रभाव का वर्णन है।

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नारद का अभिमान और माया