राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई

चौपाई १, दोहा १२८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई। करै अन्यथा अस नहिं कोई॥ संभु बचन मुनि मन नहिं भाए। तब बिरंचि के लोक सिधाए॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी जो करना चाहते हैं, वही होता है, ऐसा कोई नहीं जो उसके विरुद्ध कर सके। श्रीशिवजी के वचन नारदजी के मन को अच्छे नहीं लगे, तब वे वहाँ से ब्रह्मलोक को चल दिये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का अभिमान और माया” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का कामजय के बाद अभिमान और भगवान की माया का प्रभाव का वर्णन है।

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नारद का अभिमान और माया