संभु चरित सुनि सरस सुहावा

चौपाई १, दोहा १०४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

संभु चरित सुनि सरस सुहावा। भरद्वाज मुनि अति सुखु पावा॥ बहु लालसा कथा पर बाढ़ी। नयनन्हि नीरु रोमावलि ठाढ़ी॥ १ ॥

अर्थ

शिवजी के रसीले और सुहावने चरित्र को सुनकर मुनि भरद्वाजजी ने बहुत ही सुख पाया। कथा सुनने की उनकी लालसा बहुत बढ़ गयी। नेत्रों में जल भर आया तथा रोमावली खड़ी हो गयी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।

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शिवजी का विवाह