चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न
चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न
दोहा १०३ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु। बरनै तुलसीदासु किमि अति मतिमंद गवाँरु॥ १०३ ॥
अर्थ
गिरिजापति महादेवजी का चरित्र समुद्र के समान (अपार) है, उसका पार वेद भी नहीं पाते। तब अत्यन्त मन्दबुद्धि और गँवार तुलसीदास उसका वर्णन कैसे कर सकता है!
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का दोहा १०३ है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह