समउ जानि मुनिबरन्ह बोलाईं

चौपाई २, दोहा ३२४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

समउ जानि मुनिबरन्ह बोलाईं। सुनत सुआसिनि सादर ल्याईं॥ जनक बाम दिसि सोह सुनयना। हिमगिरि संग बनी जनु मयना॥ २ ॥

अर्थ

समय जानकर श्रेष्ठ मुनियों ने उनको बुलवाया। यह सुनते ही सुहागिनी स्त्रियाँ उन्हें आदरपूर्वक ले आईं। सुनयना जी (जनकजी की पटरानी) जनकजी की बायीं ओर ऐसी सोह रही हैं, मानो हिमाचल के साथ मैना जी शोभित हों।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह