जनक पाटमहिषी जग जानी

चौपाई १, दोहा ३२४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जनक पाटमहिषी जग जानी। सीय मातु किमि जाइ बखानी॥ सुजसु सुकृत सुख सुंदरताई। सब समेटि बिधि रची बनाई॥ १ ॥

अर्थ

जनकजी की जगद्विख्यात पटरानी और सीताजी की माता का बखान तो हो ही कैसे सकता है। सुयश, सुकृत (पुण्य), सुख और सुन्दरता सबको बटोरकर विधाता ने उन्हें सँवारकर तैयार किया है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह