कनक कलस मनि कोपर रूरे
कनक कलस मनि कोपर रूरे
चौपाई ३, दोहा ३२४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कनक कलस मनि कोपर रूरे। सुचि सुगंध मंगल जल पूरे॥ निज कर मुदित रायँ अरु रानी। धरे राम के आगें आनी॥ ३ ॥
अर्थ
पवित्र, सुगन्धित और मंगल जल से भरे सोने के कलश और मणियों की सुन्दर परातें राजा और रानी ने आनन्दित होकर अपने हाथों से लाकर श्रीरामचन्द्रजी के आगे रखीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह