समर मरन हरि हाथ तुम्हारा
समर मरन हरि हाथ तुम्हारा
चौपाई ४, दोहा १३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
समर मरन हरि हाथ तुम्हारा। होइहहु मुकुत न पुनि संसारा॥ चले जुगल मुनि पद सिर नाई। भए निसाचर कालहि पाई॥ ४ ॥
अर्थ
युद्ध में श्रीहरि के हाथ से तुम्हारी मृत्यु होगी, जिससे तुम मुक्त हो जाओगे और फिर संसार में जन्म नहीं लोगे। वे दोनों मुनि के चरणों में सिर नवाकर चले और समय पाकर राक्षस हुए।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग