एक कलप एहि हेतु प्रभु लीन्ह

दोहा १३९ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

एक कलप एहि हेतु प्रभु लीन्ह मनुज अवतार। सुर रंजन सज्जन सुखद हरि भंजन भुबि भार॥ १३९ ॥

अर्थ

देवताओं को प्रसन्न करने वाले, सज्जनों को सुख देने वाले और पृथ्वी का भार हरण करने वाले भगवान् ने एक कल्प में इसी कारण मनुष्य का अवतार लिया था।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का दोहा १३९ है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग