निसिचर जाइ होहु तुम्ह दोऊ
निसिचर जाइ होहु तुम्ह दोऊ
चौपाई ३, दोहा १३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
निसिचर जाइ होहु तुम्ह दोऊ। बैभव बिपुल तेज बल होऊ॥ भुज बल बिस्व जितब तुम्ह जहिआ। धरिहहिं बिष्नु मनुज तनु तहिआ॥ ३ ॥
अर्थ
तुम दोनों जाकर राक्षस होओ; तुम्हें महान् ऐश्वर्य, तेज और बल की प्राप्ति हो। तुम अपनी भुजाओं के बल से जब सारे विश्व को जीत लोगे, तब भगवान् विष्णु मनुष्य का शरीर धारण करेंगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग