सखिन्ह सहित हरषी अति रानी
सखिन्ह सहित हरषी अति रानी
चौपाई २, दोहा २६३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सखिन्ह सहित हरषी अति रानी। सूखत धान परा जनु पानी॥ जनक लहेउ सुखु सोचु बिहाई। पैरत थकें थाह जनु पाई॥ २ ॥
अर्थ
सखियों सहित रानी अत्यन्त हर्षित हुई। मानो सूखते हुए धान पर पानी पड़ गया हो। जनकजी ने सोच त्यागकर सुख प्राप्त किया। मानो तैरते-तैरते थके हुए पुरुष ने थाह पा ली हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “धनुषभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवधनुष-भंग और सभा में हर्षोल्लास का वर्णन है।
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धनुषभंग